भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग: उनके महत्वपूर्ण कथाएँ
शिव पुराण में इन ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन है, जिन्हें यात्राओं के दौरान भक्तिमय अनुष्ठान का प्रतीक माना जाता है। यहाँ हम 12 शिव ज्योतिर्लिंगों की कहानी और महत्व को जानेंगे।
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Keshav Jha
7/10/20251 min read


भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों की कहानी और महत्व भारतीय सनातन धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। शिव पुराण में इन ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन है, जिन्हें यात्राओं के दौरान भक्तिमय अनुष्ठान का प्रतीक माना जाता है। यहाँ हम 12 शिव ज्योतिर्लिंगों की कहानी और महत्व को जानेंगे।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में स्थित है। इसकी कथा के अनुसार, देवों के राजा चंद्रमा ने शिव की पूजा की थी और उन्होंने इस लिंग को स्थापित किया था।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: इस ज्योतिर्लिंग का स्थान अंध्र प्रदेश के श्रीशैलम मंदिर में है। कथानुसार, देवी पार्वती ने शिव की पूजा के लिए यहां आते समय एक मल्लिका फूल को चढ़ा दिया था। इसलिए यहां उनका नाम मल्लिकार्जुन पड़ा।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित है। कथा के अनुसार, यहां देवी काली ने भगवान शिव की पूजा की थी और उन्हें महाकालेश्वर बनाया था।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। इसकी कथा के अनुसार, भगवान शिव ने यहां तपस्या की थी और इस लिंग को स्थापित किया था।
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। कथा के अनुसार, देवी सती के शव के अंगों के भाग यहां गिरे थे और इससे यहां शिव का लिंग बना।
भिमाशंकर ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे के पास भिमाशंकर पहाड़ी में स्थित है। कथा के अनुसार, यहां भगवान शिव ने असुर भीमासुर का वध किया था।
रामेश्वर ज्योतिर्लिंग: रामेश्वर ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है। कथा के अनुसार, भगवान राम ने यहां शिव की पूजा की थी।
नगेश्वर ज्योतिर्लिंग: गुजरात के सूरत के पास स्थित नगेश्वर मंदिर में यह ज्योतिर्लिंग स्थित है। कथा के अनुसार, एक सांप नागा शिव की पूजा करने के लिए यहां आया था और वहां उसने एक लिंग को चूमा, जिससे वह शिव के आशीर्वाद प्राप्त करता है।
विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित है, और यहां काशीविश्वनाथ मंदिर में स्थापित है। कथा के अनुसार, भगवान विश्वनाथ ने यहां तपस्या की थी और इस लिंग को स्थापित किया था।
त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र के नासिक में स्थित है, और यहां त्र्यंबकेश्वर मंदिर में स्थापित है। कथा के अनुसार, देवी गौतमी ने यहां तपस्या की थी और शिव ने उनकी तपस्या को संतुष्ट करते हुए यहां लिंग स्थापित किया।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में स्थित है। कथा के अनुसार, पांडवों ने महाभारत के युद्ध के बाद यहां शिव की पूजा की थी।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास स्थित है, और यहां घृष्णेश्वर मंदिर में स्थापित है। कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण के पुत्र अन्ना ने यहां तपस्या की थी और शिव ने उनकी तपस्या को संतुष्ट करते हुए यहां लिंग स्थापित किया।
इन 12 ज्योतिर्लिंगों की कथाएँ और स्थानों का यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान हैं, जो भगवान शिव के भक्तिमय अनुष्ठान को और भी आत्मीय बनाते हैं। इन ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्त उनके आशीर्वाद से धन, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

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